Poetry

Punjabi Poem : किथे जा के बस गया

Punjabi Poem by me. This poem is dedicated to all women , whom’t lovers  husbands are left them or die.

sad-girl-punjabi

किथे जा के बस गया , हुन आंदा नहीं बुलाया , 
मेरे सिर देया सईयां , आजा मेरे माहिया , मेरे सिर देया सईयां , 

मेरी जींद कखा दे वांगु हो गयी, जिंदगी गरम ह्ववां वरगी,
सानु किथे ढोई नी मिलदी , तेरी थंडीयाँ दुआवां वर्गी,
जा के पंज पीरां दे, मैं मन्नत मांग के आई हाँ, ओ मेरे सिर देया सईयां
आजा मेरे माहिया , मेरे सिर देया सईयां।

मेरा राँझा तू, मेरा पुन्नू तू, मेरा बंसी वाला श्याम वी तू,
मेरा मिर्ज़ा तू, मेरा युसूफ तू, मेरा पुरुशूतम राम वी तू,
मैं तेनु मंदिर लब्या , मैं मसीते लब्या, मैं लब्या तेनु तख़्त हज़ारे वी,
मैं तेन्नु लब्ब थल्लां विच वी आई हाँ, ओ मेरे सिर देया सईयां
आजा मेरे माहिया , मेरे सिर देया सईयां।

तीजां दे विच सजियां सुहागणना , लन्दियां ने पींग हुलारा,
मैं अंदर वड्ड – वड्ड के रोयाँ, बैठी तस्वीर तेरी नु निहारा,
मैं छड्ड ती लाल फुलकारी वी, मैं अंदर टांग किल्ली ते प्रान्दी आई हाँ, ओ मेरे सिर देया सईयां
आजा मेरे माहिया , मेरे सिर देया सईयां।

फुल्लां वर्गी ज़िन्दगी सी नाल तेरे, हूँ होगी पहाड़ां तो भारी,
चंदरी दुनिया दी नज़र बुरी मनु टूक – टूक जावे ताड़ी,
तू की जाने कीदा कट्टे ने दिन, असी कीदा रो – रो के रात लंगायी आ , ओ मेरे सिर देया सईयां
आजा मेरे माहिया , मेरे सिर देया सईयां।

मनु पता ऐ तू मुड़ आणा हैनि, तू जा के वास गया विच शमसाने,
गल्लाँ उस नु दासियाँ हैनि, पर “अमन” दिल दियां जाने,
गुज़रे वक़्त आ जावण मुड के, यह मांग के गुरुदवारे आई हाँ, ओ मेरे सिर देया सईयां
आजा मेरे माहिया , मेरे सिर देया सईयां।

With Love

Aman Dhally